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Indian Music Online GK Test – 9

Indian Music Online GK Test – 9 : नमस्कार दोस्तों शिक्षणजगत पर आपका सबका हार्दिक स्वागत है | जैसा की आप सब जानते है की हम आपके लिए हररोज सामान्य ज्ञान का ऑनलाइन टेस्ट लेकर आते है | यह टेस्ट आप को कोई भी प्रतियोगिता परीक्षाओ के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा | आज हम इस कड़ी में Indian Music (भारतीय संगीत) से जुड़े कुछ रोचक प्रश्न लेकर आए है |

वैदिक युग में ‘संगीत’ समाज में स्थान बना चुका था। सबसे प्राचीन ग्रन्थ ‘ऋग्वेद’ में आर्यो के आमोद-प्रमोद का मुख्य साधन संगीत को बताया गया है। अनेक वाद्यों का आविष्कार भी ऋग्वेद के समय में बताया जाता है। ‘यजुर्वेद’ में संगीत को अनेक लोगों की आजीविका का साधन बताया गया, फिर गान प्रधान वेद ‘सामवेद’ आया, जिसे संगीत का मूल ग्रन्थ माना गया। ‘सामवेद’ में उच्चारण की दृष्टि से तीन और संगीत की दृष्टि से सात प्राकार के स्वरों का उल्लेख है। ‘सामवेद’ का गान (सामगान) मेसोपोटामिया, फैल्डिया, अक्कड़, सुमेर, बवेरु, असुर, सुर, यरुशलम, ईरान, अरब, फिनिशिया व मिस्र के धार्मिक संगीत से पर्याप्त मात्रा में मिलता-जुलता था।

Indian Music Online GK Test – 9

टेस्ट कैसे दे और परिणाम कैसे पाए ?

  • सबसे पहले आप टेस्ट को पढ़ ले |
  • प्रश्न के सामने रखे गए गोल रेडियो बटन को क्लिक कर आप चार में से एक सही जवाब पसंद कर सकते है |
  • एसे करके 10 प्रश्नों के सही उत्तर पसंद कर ले |
  • अंत में SUBMIT बटन पर क्लिक क्र टेस्ट को समाप्त करे |
  • टेस्ट समाप्त होते ही आप को आपका स्कोर नजर आएगा और सब प्रश्नों के सही उत्तर भी दिखाई देंगे |
  • और हां हमारे टेस्ट में हमने एक नया फीचर भी एड करा है जो है – ‘Certificate’.
  • आप क्विज़ पूरा करने के बाद अपना certificate दि गई लिंक पर क्लिक कर के डाऊनलोड कर सकते है |

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Indian Music Online GK Test – 9

भारतीय संगीत प्राचीन काल से भारत मे सुना और विकसित होता संगीत है। इस संगीत का प्रारंभ वैदिक काल से भी पूर्व का है। इस संगीत का मूल स्रोत वेदों को माना जाता है। हिंदु परंपरा मे ऐसा मानना है कि ब्रह्मा ने नारद मुनि को संगीत वरदान में दिया था।

पंडित शारंगदेव कृत “संगीत रत्नाकर” ग्रंथ मे भारतीय संगीत की परिभाषा “गीतम, वादयम् तथा नृत्यं त्रयम संगीतमुच्यते” कहा गया है। गायन, वाद्य वादन एवम् नृत्य; तीनों कलाओं का समावेश संगीत शब्द में माना गया है। तीनो स्वतंत्र कला होते हुए भी एक दूसरे की पूरक है। भारतीय संगीत की दो प्रकार प्रचलित है; प्रथम कर्नाटक संगीत, जो दक्षिण भारतीय राज्यों में प्रचलित है और हिन्दुस्तानी संगीत शेष भारत में लोकप्रिय है। भारतवर्ष की सारी सभ्यताओं में संगीत का बड़ा महत्व रहा है। धार्मिक एवं सामाजिक परंपराओं में संगीत का प्रचलन प्राचीन काल से रहा है। इस रूप में, संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा मानी जाती है। वैदिक काल में अध्यात्मिक संगीत को मार्गी तथा लोक संगीत को ‘देशी’ कहा जाता था। कालांतर में यही शास्त्रीय और लोक संगीत के रूप में दिखता है।

वैदिक काल में सामवेद के मंत्रों का उच्चारण उस समय के वैदिक सप्तक या सामगान के अनुसार सातों स्वरों के प्रयोग के साथ किया जाता था। गुरू-शिष्य परंपरा के अनुसार, शिष्य को गुरू से वेदों का ज्ञान मौखिक ही प्राप्त होता था व उन में किसी प्रकार के परिवर्तन की संभावना से मनाही थी। इस तरह प्राचीन समय में वेदों व संगीत का कोई लिखित रूप न होने के कारण उनका मूल स्वरूप लुप्त होता गया।

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One comment

  1. Superb questions

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